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साम्प्रदायिक सौहार्द के कुछ उदाहरण

A. वाराणसी में मुस्लिम औरत शिवलिंग बनाती है

वाराणसी की मीत आलम आरा, एक मुस्लिम महिला पिछले सत्रह वर्षों से शिवलिंग बनाकर बेच रही है। उसका मानना है कि हम सब पहले हिन्दुस्तानी हैं और हिन्दूमुस्लिम को बांटने का प्रयास करना सिर्फ एक समय और ताकत की बरबादी है। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म, हिन्दू देवी देवताओं की मूर्ति बनाने में बाधक नहीं होना चाहिए। यह अपने आप में एक दोनों सम्प्रदाय के बीच इन्सानियत एवं आपसी मुहब्बत की अनोखी मिसाल है।

B. केरल के गाँव में हिन्दू एवं मुस्लिम एक दूसरे के त्योहार में शामिल हुए

साम्प्रदायिक सौहार्द के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए केरल के मन्जेशवरम शहर के उदयवर गाँव में मुसलमान वहाँ के मंदिर द्वारा आयोजित वार्षिक रथयात्रा में उत्साह से भाग लेते हैं। उसी तरह हिन्दु भी वहाँ के मस्जिद द्वारा आयोजित धार्मिक आयोजनों में बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

C. केरल में मुस्लिमों ने मंदिर के लिए जमीन दान किए

केरल के मल्लापुरम जिले के चेथनगोटूपूरम में नम्बियारथोड़ी अली नामक मुस्लिम ने कुन्दादा शिव मंदिर समिति को अपनी जमीन में स्थित तालाब को मन्दिर की जरूरत के लिए बिना एक पैसा लिए दान में दिया। उनके द्वारा साम्प्रदायिक सौहार्द स्थापित करने के इस अच्छे काम के लिए मंदिर समिति द्वारा उन्हें शिवरात्री के दौरान सम्मानित किया गया।

D. विवाह सामरोह के बड़े आयोजन में हिन्दूमुस्लिम जोड़ों का साथसाथ विवाह

हिन्दूमुस्लिम एका, मजहवी मुहब्बत और भाईचारे का संदेश फैलाने के लिए उत्तर प्रदेश, कानपुर जिले के रावतपुर गाँव में हिन्दूमुस्लिम जोड़ों ने सामुहिक विवाह सामरोह कार्यक्रम में विवाह किया। इस अनोखे कार्यक्रम की शुरूआत एक मुस्लिम द्वारा की गयी और परिणाम स्वरूप, इस विशाल कार्यक्रम में सिर्फ 8000 से ज्यादा ग्रामीणों ने भाग लिया अपितु इस कार्यक्रम का जिम्मा भी हिन्दूमुसलमानों ने मिलकर उठाया।

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